Wednesday, March 20, 2024

संस्कृत भाषा

 विश्व की सबसे ज्यादा समृद्ध भाषा कौन सी है ? 


अंग्रेजी में 'THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG' एक प्रसिद्ध वाक्य है। जिसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए हैं। मज़ेदार बात यह है की अंग्रेज़ी वर्णमाला में कुल 26 अक्षर ही उप्लब्ध हैं जबकि इस वाक्य में 33 अक्षरों का प्रयोग किया गया है। जिसमें चार बार O और A, E, U तथा R अक्षर का प्रयोग क्रमशः 2 बार किया गया है। इसके अलावा इस वाक्य में अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है। जहां वाक्य T से शुरु होता है वहीं G से खत्म हो रहा है। 


अब ज़रा संस्कृत के इस श्लोक को पढिये।-


*क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।*

*तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।* 


अर्थात: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन ?? राजा मय ! जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।


श्लोक को ध्यान से पढ़ने पर आप पाते हैं की संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस श्लोक में दिखाई दे रहे हैं वो भी क्रमानुसार। यह खूबसूरती केवल और केवल संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा में ही देखने को मिल सकती है! 


पूरे विश्व में केवल एक संस्कृत ही ऐसी भाषा है जिसमें केवल *एक अक्षर* से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है। किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोडे में बहुत कहा है-


*न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नानानना ननु।*

*नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नुन्ननुन्ननुत्॥*


अर्थात: जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है। वंदेसंस्कृतम्! 


एक और उदहारण है।


*दाददो दुद्द्दुद्दादि दादादो दुददीददोः।*

*दुद्दादं दददे दुद्दे ददादददोऽददः।।*


अर्थात: दान देने वाले, खलों को उपताप देने वाले, शुद्धि देने वाले, दुष्ट्मर्दक भुजाओं वाले, दानी तथा अदानी दोनों को दान देने वाले, राक्षसों का खंडन करने वाले ने, शत्रु के विरुद्ध शस्त्र को उठाया।


है ना खूबसूरत !! इतना ही नहीं, क्या किसी भाषा में केवल *2 अक्षर* से पूरा वाक्य लिखा जा सकता है ?? संस्कृत भाषा के अलावा किसी और भाषा में ये करना असंभव है। माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल “भ” और “र ” दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है। देखिये -


*भूरिभिर्भारिभिर्भीराभूभारैरभिरेभिरे*

*भेरीरे। भिभिरभ्राभैरभीरुभिरिभैरिभा:।।*


अर्थात- निर्भय हाथी जो की भूमि पर भार स्वरूप लगता है, अपने वजन के चलते, जिसकी आवाज नगाड़े की तरह है और जो काले बादलों सा है, वह दूसरे दुश्मन हाथी पर आक्रमण कर रहा है।


एक और उदाहरण -


*क्रोरारिकारी कोरेककारक कारिकाकर।*

*कोरकाकारकरक: करीर कर्करोऽकर्रुक॥*


अर्थात - क्रूर शत्रुओं को नष्ट करने वाला, भूमि का एक कर्ता, दुष्टों को यातना देने वाला, कमलमुकुलवत, रमणीय हाथ वाला, हाथियों को फेंकने वाला, रण में कर्कश, सूर्य के समान तेजस्वी [था]।


पुनः क्या किसी भाषा मे केवल *तीन अक्षर* से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है ?? यह भी संस्कृत भाषा के अलावा किसी और भाषा में असंभव है!

उदहारण - 


*देवानां नन्दनो देवो नोदनो वेदनिंदिनां।*

*दिवं दुदाव नादेन दाने दानवनंदिनः।।*


अर्थात - वह परमात्मा [विष्णु] जो दूसरे देवों को सुख प्रदान करता है और जो वेदों को नहीं मानते उनको कष्ट प्रदान करता है। वह स्वर्ग को उस ध्वनि नाद से भर देता है, जिस तरह के नाद से उसने दानव [हिरण्यकशिपु] को मारा था।


जब हम कहते हैं की संस्कृत इस पूरी दुनिया की सभी प्राचीन भाषाओं की जननी है तो उसके पीछे इसी तरह के खूबसूरत तर्क होते हैं। यह विश्व की अकेली ऐसी भाषा है, जिसमें "अभिधान-सार्थकता" मिलती है। अर्थात् अमुक वस्तु की अमुक संज्ञा या नाम क्यों है, यह प्रायः सभी शब्दों में मिलता है। जैसे इस विश्व का नाम संसार है तो इसलिये है क्यूँकि वह चलता रहता है, परिवर्तित होता रहता है-

संसरतीति संसारः गच्छतीति जगत् आकर्षयतीति कृष्णः रमन्ते योगिनो यस्मिन् स रामः इत्यादि।


विश्व की अन्य भाषाओं में ऐसी अभिधानसार्थकता नहीं है। Good का अर्थ अच्छा, भला, सुंदर, उत्तम, प्रियदर्शन, स्वस्थ आदि है। किसी अंग्रेजी विद्वान् से पूछो कि ऐसा क्यों है तो वह कहेगा है बस पहले से ही इसके ये अर्थ हैं। क्यों हैं वो ये नहीं बता पायेगा। 


ऐसी सरल, तर्कसंगत और समृद्ध भाषा आज अपने ही देश में अपने ही लोगों में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड रही है बेहद चिंताजनक है।

 संस्कृत का अध्ययन और अध्यापन इस देश की गौरवमयी संस्कृति के ज्ञान के लिए अत्यंत आवश्यक है । जय संस्कृत, जय संस्कृति !

संस्कृत क्यों विशेष है !

अब लौटते हैं वापिस संस्कृत के महत्व पर !

बचपन में अंग्रेज़ी का रुतबा था मेरे मन पर !

खूब सीखा , लिखने में अत्यंत दक्ष हुआ किंतु बोलने में मन नहीं लगा ,

माँ को मम्मी कहने में बड़ी असुविधा लगी !

माता, माते और मय्या से आगे नहीं जा पाया !

फिर उर्दू का ड़ नशा चढ़ा ,ग़ालिब ,मीर ,ज़ौक़ , साहिर,कैफ़ि , मलीहाबादी ,फ़िराक़ , इक़बाल और न जाने कितनी के दीवान पढ़े !

फिर अधिकारी हुआ , प्रबंधन सूत्र में ये सब गोल थे ,

फिर ड्रकर ,कॉट्लर, कोवे, टॉम पीटर , मेसलो,वन मिनट मैनेजर ,Wayne dyer को पढ़ा ,

फिर देखा बंदे गीता ,उपनिषद की बात कर रहे हैं ,

घर में गीता ,रामायण और ये सब पढ़ ही रहा था किंतु सच्चा प्रेम नहीं था !

अब नयी दृष्टि से देखना शुरू किया !फिर पाया कि संस्कृत के साहित्य के आगे सब बौने हैं vah भी तब जब पिछले चार सौ साल में कुछ भी नहीं likha गया hai !

अब एक उदाहरण देखे :भारत सरकार के सभी महत्व पूर्ण विभाग के आदर्श वाक्य देखें 

हमारा LIC का hai योगक्षेमं वहाम्यहम् ,

Oriental insurance ka hai , अग्नये सुपथा राये 

GIC का है आपातकाले रक्षयामि

agriculture insurance कम्पनी का कृषक यत्न रक्षणम है

.विभिन्न संस्थाओं के संस्कृत ध्येय वाक्य :-

.भारत सरकार 👉 सत्यमेव जयते

लोक सभा 👉 धर्मचक्र प्रवर्तनाय

उच्चतम न्यायालय 👉 यतो धर्मस्ततो जयः

आल इंडिया रेडियो 👉 सर्वजन हिताय सर्वजनसुखाय 

‌दूरदर्शन 👉 सत्यं शिवं सुन्दरम्

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गोवा राज्य 👉 सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।

भारतीय जीवन बीमा निगम 👉 योगक्षेमं वहाम्यहम्

डाक तार विभाग 👉 अहर्निशं सेवामहे

श्रम मंत्रालय 👉 श्रम एव जयते

भारतीय सांख्यिकी संस्थान 👉 भिन्नेष्वेकस्य दर्शनम्

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थल सेना 👉 सेवा अस्माकं धर्मः

वायु सेना 👉 नभःस्पृशं दीप्तम्

जल सेना 👉 शं नो वरुणः

मुंबई पुलिस 👉 सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय

हिंदी अकादमी 👉 अहं राष्ट्री संगमनी वसूनाम्

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भारतीय राष्ट्रीय विज्ञानं अकादमी 👉 हव्याभिर्भगः सवितुर्वरेण्यम्

भारतीय प्रशासनिक सेवा अकादमी 👉 योगः कर्मसु कौशलम्

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग 👉 ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये

नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन 👉 गुरुर्गुरुतमो धाम

गुरुकुल काङ्गडी विश्वविद्यालय 👉 ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत

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इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय 👉 ज्योतिर्व्रणीत तमसो विज्ञानन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय 👉 विद्ययाऽमृतमश्नुते

आन्ध्र विश्वविद्यालय 👉 तेजस्विनावधीतमस्तु

बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय शिवपुर 👉 उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत

गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय 👉 आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः

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संपूणानंद संस्कृत विश्वविद्यालय 👉 श्रुतं मे गोपाय

श्री वैंकटेश्वर विश्वविद्यालय 👉 ज्ञानं सम्यग् वेक्षणम्

कालीकट विश्वविद्यालय 👉 निर्भय कर्मणा श्री

दिल्ली विश्वविद्यालय 👉 निष्ठा धृति: सत्यम्

केरल विश्वविद्यालय 👉 कर्मणि व्यज्यते प्रज्ञा

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राजस्थान विश्वविद्यालय 👉 धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा

पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय 👉

युक्तिहीने विचारे तु धर्महानि: प्रजायते

वनस्थली विद्यापीठ 👉 सा विद्या या विमुक्तये

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् 👉

विद्याsमृतमश्नुते

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केन्द्रीय विद्यालय 👉 तत् त्वं पूषन् अपावृणु

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 👉 असतो मा सद्गमय

प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम 👉 कर्मज्यायो हि अकर्मण:

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर 👉 धियो यो नः प्रचोदयात्

गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी महाविद्यालय, पौड़ी 👉 तमसो मा ज्योतिर्गमय

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मदनमोहन मालवीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय गोरखपुर 👉 योगः कर्मसु कौशलम्

लभारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय, हैदराबाद 👉 संगच्छध्वं संवदध्वम्

इंडिया विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय विधि विद्यालय 👉 धर्मो रक्षति रक्षितः

संत स्टीफन महाविद्यालय, दिल्ली 👉 सत्यमेव विजयते नानृतम्

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान 👉 शरीरमाद्यं खलुधर्मसाधनम्

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विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर 👉 योग: कर्मसु कौशलम्

मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,इलाहाबाद 👉 सिद्धिर्भवति कर्मजा

बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी 👉 ज्ञानं परमं बलम्

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर 👉 योगः कर्मसुकौशलम्

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई 👉 ज्ञानं परमं ध्येयम्

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर 👉 तमसो मा ज्योतिर्गमय

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई 👉 सिद्धिर्भवति कर्मजा

भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद 👉 विद्या विनियोगाद्विकास:

भारतीय प्रबंधन संस्थान बंगलौर 👉 तेजस्वि नावधीतमस्तु

भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझीकोड 👉 योगः कर्मसु कौशलम्

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की 👉 श्रमं विना नकिमपि साध्यम्

सेना ई एम ई कोर 👉 कर्मह हि धर्मह

सेना राजपूताना राजफल 👉 वीर भोग्या वसुन्धरा

सेना मेडिकल कोर 👉 सर्वे संतु निरामया ..

सेना शिक्षा कोर 👉 विद्यैव बलम्

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सेना एयर डिफेन्स 👉 आकाशेय शत्रुन् जहि

सेना ग्रेनेडियर रेजिमेन्ट 👉 सर्वदा शक्तिशालिम्

सेना राजपूत बटालियन 👉 सर्वत्र विजये

सेना डोगरा रेजिमेन्ट 👉 कर्तव्यम् अन्वात्मा

सेना गढवाल रायफल 👉 युद्धया कृत निश्चयः

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सेना कुमायू रेजिमेन्ट 👉 पराक्रमो विजयते

सेना महार रेजिमेन्ट 👉 यश सिद्धि

सेना जम्मू काश्मीर रायफल 👉 प्रस्थ रणवीरता

सेना कश्मीर लाइट इंफैन्ट्री 👉 बलिदानं वीर-लक्ष्यम्

सेना इंजीनियर रेजिमेन्ट 👉 सर्वत्र

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भारतीय तट रक्षक 👉 वयम् रक्षामः

सैन्य विद्यालय 👉 युद्धं प्रगायय?

सैन्य अनुसंधान केंद्र 👉 बलस्य मूलं विज्ञानम्

मित्रों ! ये सिलसिला यहीं खतम नहीं होता...विदेशी भी हमारे कायल हैं देखो जरा...

नेपाल सरकार 👉 जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

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पञ्चचित पेरादेनिया विश्वविद्यालय 👉 सर्वस्य लोचनशास्त्रम्

कोलंबो विश्वविद्यालय- (श्रीलंका) 👉 बुद्धि: सर्वत्र भ्राजते

इंडोनेशिया - जलसेना 👉 जलेष्वेव जयामहे पञ्चचित

मोराटुवा विश्वविद्यालय (श्रीलंका) 👉 विद्यैव सर्वधनम् पेरादे 

संस्कृत और संस्कृति ही भारतीयता का मूल है .. भारत ही नहीं विश्व ही का विकास इसी से संभव है ! 

विश्व को परिवार सिर्फ़ यही भाषा कहती है वरना शेष भाषाएँ प्रांत विशेष को ही अपना कहती हैं !

सारा विश्व विरोधी है किंतु चोरी करणे को यहीं के रत्न भाते हैं 

अमेरिका ने अणु बम गिराया तो गीता को दोहराया !

तो कीजिये अपने गौरव को याद और सिर उठाकर कहिये "हम भारतीय हैं और संस्कृत हमारी पहचान है, हमें अपने गौरव का अभिमान है।

जयतु_संस्कृतम्_जयतु_भारतम्_ जयतु जगत 


🌹🙏

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